~गलत फैसलों ने ज़िंदगी को मुश्किल बना दिया था~
सावित्री की पहली महत्वपूर्ण भूमिका 1952 तेलुगू फिल्म पेली चेसी चोंडो में थी 1960 में, तेलुगू फिल्म चिवराकु मिइगेली में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। 1968 में, उन्होंने तेलुगू फिल्म चिन्नारी पप्पू का निर्माण और निर्देशन किया, जिसके लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (रजत) के लिए राज्य नंदी पुरस्कार प्राप्त किया। भारत के 30 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में उन्हें “सिनेमा में महिलाओं” में सम्मानित किया गया था।
सावित्री का जन्म 4 जनवरी 1936 को मद्रास प्रेसीडेंसी के चुर्रुरु जिले में हुआ था। उसके पिता की मृत्यु होने के जब वह छः महीने की थी, जिसके बाद उनकी मां ने सावित्री और बड़े भाई मारुति को चाचा और चाची के साथ रहने के लिए लिये भेज दिया। उनके चाचा, कॉमरेड्डी वेंकटरामैया चौधरी, ने जब सावित्री की नृत्य प्रतिभा को देखा तो उन्हें नृत्य सीखने के भी भेज दिया था।
सावित्री की हिंदी फ़िल्में थी बहुत दिन हुए, घर बसा के देखो, बलराम श्री कृष्ण और गंगा की लहरें ।
सावित्री ने 1952 में तमिल अभिनेता जैमिनी गणेशन से शादी की, पहली बार उन्हें 1948 में मुलाकात हुई। शादी के कारण उनके चाचा के साथ रिश्ते ख़राब हो गए थे। क्योंकि जैमिनी गणेशन पहले से ही विवाह कर चुके थे, उनकी चार बेटियां थीं और अभिनेत्री पुष्पवल्ली के साथ चक्कर में शामिल थे। बाद में जैमिनी गणेशन ने स्वीकार किया कि उनके पास पुष्पवल्ली के साथ दो बेटियां थीं जबकि सावित्री से शादी हुई थी, जिनके साथ उनकी बेटी और एक बेटा था।
जैमिनी गणेशन ने शादीशुदा पुष्पवल्ली से इश्क़ लड़ाया लेकिन कभी शादी नही की और उससे भी दो बेटियां हुई। खास बात ये है कि उन दो बेटियों में से एक मशहूर बॉलीवुड सुपरस्टार रेखा थी दूसरी बेटी का नाम राधा था जोकि अब यूएसए में रहती है। पुष्पवल्ली की दोनों बेटियों को जैमिनी गणेशन ने कभी स्वीकार नही किया और ना ही पुष्पवल्ली के पति ने। एक तरफ उनके पति की वैध बीवी दूसरी तरफ एक औरत जिसे पत्नी का दर्जा नहीं मिला और सभी के बच्चे। सावित्री जैमिनी गणेशन से इस बात पर भी लड़ जाती है कि उसे रेखा और राधा को अपनी संतान स्वीकार करना चाहिए लेकिन जैमिनी गणेशन नही मानते। पारिवारिक क्लेश और दुनिया वालो के तानो से उसकी मनोदशा दिन ब दिन खराब होती जाती है और शराब के नशे में डूब जाती है और 19 महीने कोमा में रहने के बाद अन्ततः उनकी मृत्यु 26 दिसम्बर 1981 को हो जाती है।
सावित्री की पहली महत्वपूर्ण भूमिका 1952 तेलुगू फिल्म पेली चेसी चोंडो में थी 1960 में, तेलुगू फिल्म चिवराकु मिइगेली में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार मिला। 1968 में, उन्होंने तेलुगू फिल्म चिन्नारी पप्पू का निर्माण और निर्देशन किया, जिसके लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (रजत) के लिए राज्य नंदी पुरस्कार प्राप्त किया। भारत के 30 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में उन्हें “सिनेमा में महिलाओं” में सम्मानित किया गया था।
सावित्री का जन्म 4 जनवरी 1936 को मद्रास प्रेसीडेंसी के चुर्रुरु जिले में हुआ था। उसके पिता की मृत्यु होने के जब वह छः महीने की थी, जिसके बाद उनकी मां ने सावित्री और बड़े भाई मारुति को चाचा और चाची के साथ रहने के लिए लिये भेज दिया। उनके चाचा, कॉमरेड्डी वेंकटरामैया चौधरी, ने जब सावित्री की नृत्य प्रतिभा को देखा तो उन्हें नृत्य सीखने के भी भेज दिया था।
सावित्री की हिंदी फ़िल्में थी बहुत दिन हुए, घर बसा के देखो, बलराम श्री कृष्ण और गंगा की लहरें ।

सावित्री ने 1952 में तमिल अभिनेता जैमिनी गणेशन से शादी की, पहली बार उन्हें 1948 में मुलाकात हुई। शादी के कारण उनके चाचा के साथ रिश्ते ख़राब हो गए थे। क्योंकि जैमिनी गणेशन पहले से ही विवाह कर चुके थे, उनकी चार बेटियां थीं और अभिनेत्री पुष्पवल्ली के साथ चक्कर में शामिल थे। बाद में जैमिनी गणेशन ने स्वीकार किया कि उनके पास पुष्पवल्ली के साथ दो बेटियां थीं जबकि सावित्री से शादी हुई थी, जिनके साथ उनकी बेटी और एक बेटा था।
जैमिनी गणेशन ने शादीशुदा पुष्पवल्ली से इश्क़ लड़ाया लेकिन कभी शादी नही की और उससे भी दो बेटियां हुई। खास बात ये है कि उन दो बेटियों में से एक मशहूर बॉलीवुड सुपरस्टार रेखा थी दूसरी बेटी का नाम राधा था जोकि अब यूएसए में रहती है। पुष्पवल्ली की दोनों बेटियों को जैमिनी गणेशन ने कभी स्वीकार नही किया और ना ही पुष्पवल्ली के पति ने। एक तरफ उनके पति की वैध बीवी दूसरी तरफ एक औरत जिसे पत्नी का दर्जा नहीं मिला और सभी के बच्चे। सावित्री जैमिनी गणेशन से इस बात पर भी लड़ जाती है कि उसे रेखा और राधा को अपनी संतान स्वीकार करना चाहिए लेकिन जैमिनी गणेशन नही मानते। पारिवारिक क्लेश और दुनिया वालो के तानो से उसकी मनोदशा दिन ब दिन खराब होती जाती है और शराब के नशे में डूब जाती है और 19 महीने कोमा में रहने के बाद अन्ततः उनकी मृत्यु 26 दिसम्बर 1981 को हो जाती है।
जैमिनी गणेशन ने शादीशुदा पुष्पवल्ली से इश्क़ लड़ाया लेकिन कभी शादी नही की और उससे भी दो बेटियां हुई। खास बात ये है कि उन दो बेटियों में से एक मशहूर बॉलीवुड सुपरस्टार रेखा थी दूसरी बेटी का नाम राधा था जोकि अब यूएसए में रहती है। पुष्पवल्ली की दोनों बेटियों को जैमिनी गणेशन ने कभी स्वीकार नही किया और ना ही पुष्पवल्ली के पति ने। एक तरफ उनके पति की वैध बीवी दूसरी तरफ एक औरत जिसे पत्नी का दर्जा नहीं मिला और सभी के बच्चे। सावित्री जैमिनी गणेशन से इस बात पर भी लड़ जाती है कि उसे रेखा और राधा को अपनी संतान स्वीकार करना चाहिए लेकिन जैमिनी गणेशन नही मानते। पारिवारिक क्लेश और दुनिया वालो के तानो से उसकी मनोदशा दिन ब दिन खराब होती जाती है और शराब के नशे में डूब जाती है और 19 महीने कोमा में रहने के बाद अन्ततः उनकी मृत्यु 26 दिसम्बर 1981 को हो जाती है।
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