Wednesday, 23 January 2019

जब 'ट्रेजडी क्वीन' मीना कुमारी ने संगीतकार नौशाद अली के लिए लिखी थी शायरी


भारतीय सिनेमा में पाकीज़ा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जा चूका है. इस फिल्म ने मीना कुमारी को एक अलग ही पहचान दिलाई. मीना कुमारी एक अदाकारा के साथ साथ गजब की शायर भी थी. उन्होंने नौशाद अली के लिए शायरी लिखते हुए कहा की '' नौशाद साहब जब रात आती है तो मुझे सुबह का इंतजार रहता है और जब दिन आता है तो रात आने का ख़ौफ़".

उन्होंने अक्सर अपने जीवन के दर्द और तकलीफों को ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ों के ज़रिये बयान किया. चांद तन्हा है आसमां तन्हा, दिल मिला है कहां-कहां तन्हा, टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, शीशे का बदन, उनकी लिखी नज़्में हैं.

एक किताब 'नौशाद, जर्रा जो आफ़ताब बना' में लेखक चौधरी ज़िया इमाम ने मीना कुमारी के जज़्बातों से संबंधित किस्सों का जिक्र किया है. दरहसल, एक दिन फिल्म पाकीज़ा की शूटिंग ख़तम होने के बाद मीना कुमारी नौशाद अली के घर गयीं और उनके काम की सराहना की. उन दिनों उनकी तबियत खराब थी उन्होंने नौशाद से कहा कि "नौशाद साहब जब रात आती है तो मुझे सुबह का इंतजार रहता है और जब दिन आता है तो रात आने का ख़ौफ़''.

इस पर नौशाद साहब ने मीना कुमारी को एक शेर लिखकर दिया था-
"देख सूरज उफ़क़ में डूब गया, धूप एक सिर से तेरे और ढली
एक दिन उलझनों का और गया, एक कड़ी जिंदगी की और कटी".

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