Abhimaan (1973) : अमिताभ- जया श्रेष्ठ हैं या कला और प्रतिभा?
फिल्म के विषय में वापिस आयें तो फिल्म में वास्तव में जान पड़ती है डेविड के मैदान में उतरने के बाद और उससे भी ज्यादा तब जब वे उमा को सुबीर के साथ गाते हुये सुनते हैं और अपने साथी से कहते हैं कि अच्छा हो यदि सुबीर उमा को अपने साथ व्यवसायिक रुप से गाने के लिये विवश न करे।
वे कहते हैं,” देखते नहीं, उमा सुबीर से ज्यादा प्रतिभाशाली है और पुरुषों को बचपन से घुट्टी में पिलाया जाता है कि वे श्रेष्ठ हैं”
साथी लापरवाही से कहता है,” अरे साहब सारी प्रतिभा रसोईघर में और बच्चों को पालने में निकल जायेगी”।
डेविड कहते हैं,” यह तो और भी बुरा होगा”।
डेविड की चिंता जायज है, और आज भी प्रासंगिक है।
स्त्री की प्रतिभा का क्या हो मौटे तौर पर पुरुष द्वारा संचालित इस संसार में?
क्या एक पत्नी सिर्फ इसलिये अपनी प्रतिभा का गला घोट दे कि उसके खुलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने से उसके पति का समाज में स्थान उसकी शोहरत और प्रतिभा के सामने कम हो जायेगा?
जनक की सभा में हुये गार्गी याज्ञवल्क्य शास्त्रार्थ की विरासत सनातन काल से चली रही है और भले ही यह घटना भारत में घटी हो पर सत्य यह विश्व की सभी सभ्यताओं के संदर्भ में है।
अभिमान से कुछ ही साल पहले विजय आनंद ने दिखाया था कि कैसे राजू गाइड ने अभिमान के साथ गुस्से में हिकारत भरी दृष्टि से रोज़ी को देखते हुये कहा था कि तुम आज जो इतनी शोहरत और दौलत बटोर रही हो, यह और सारी तुम्हारी सफलता सब मेरी सूझबूझ और मेहनत का नतीजा है वरना तुम क्या थीं – अपने पति के व्यवहार से कुंठित होकर आत्महत्या का प्रयास करने वाली एक कमजोर औरत।

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