Another beautiful song with two versions:Do Pehlu, Do Rang, Do Geet By Lata Mangeshkar and Mohammad Rafi composed by Roshan. This is from the movie Bheegi Raat (1965). It had Meena Kumari, Pradeep Kumar and Ashok Kumar.
The Lata version is the usual romantic song- Meena Kumari expressing her love for Pradeep Kumar. The Rafi version is in a situation that could happen only in Hindi movies - the hero singing this song in a party where his beloved is marrying someone else. Several movies had these situation. Music is by Roshan and lyrics by Majrooh Sultanpuri.
Lata version
Rafi version
(Lata version)
दिल जो ना कह सका
वही राज़-ए-दिल कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
नगमा सा कोई जाग उठा बदन में
झंकार की सी थरथरी है तन में
झंकार की सी थरथरी है तन में
हो प्यार की इन्हीं धड़कती
धड़कती फिज़ाओं में, रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
अब तक दबी थी इक मौज़ ए अरमाँ
लब तक जो आई बन गई है तूफाँ
लब तक जो आई बन गई है तूफाँ
हो..,, बात प्यार की बहकती
बहकती निगाहों से कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
गुजरे ना ये शब, खोल दूँ ये जुल्फ़ें
तुमको छुपा लूँ मूँद के ये पलकें
तुमको छुपा लूँ मूँद के ये पलकें
हो..बेकरार सी लरज़ती
लरज़ती सी छाँव में रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
----
(Rafi version)
दिल जो ना कह सका
वोही राज़-ए-दिल कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
तौबा ये किस ने अंजुमन सजा के
टुकड़े किये हैं गुंच-ए-वफ़ा के - २
उछालो गुलों के टुकड़े
के रंगीं फ़िज़ाओं में रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
चलिये मुबारक ये जश्न दोस्ती का
दामन तो थामा आप ने किसी का - २
हमें तो खुशी यही है
तुम्हें भी किसी को अपना कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
सागर उठाओ दिल का किस को ग़म है
आज दिल की क़ीमत जाम से भी कम है - २
पियो चाहे खून-ए-दिल हो
के पीते पिलाते ही रहने की रात आई
The Lata version is the usual romantic song- Meena Kumari expressing her love for Pradeep Kumar. The Rafi version is in a situation that could happen only in Hindi movies - the hero singing this song in a party where his beloved is marrying someone else. Several movies had these situation. Music is by Roshan and lyrics by Majrooh Sultanpuri.
Lata version
Rafi version
(Lata version)
दिल जो ना कह सका
वही राज़-ए-दिल कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
नगमा सा कोई जाग उठा बदन में
झंकार की सी थरथरी है तन में
झंकार की सी थरथरी है तन में
हो प्यार की इन्हीं धड़कती
धड़कती फिज़ाओं में, रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
अब तक दबी थी इक मौज़ ए अरमाँ
लब तक जो आई बन गई है तूफाँ
लब तक जो आई बन गई है तूफाँ
हो..,, बात प्यार की बहकती
बहकती निगाहों से कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
गुजरे ना ये शब, खोल दूँ ये जुल्फ़ें
तुमको छुपा लूँ मूँद के ये पलकें
तुमको छुपा लूँ मूँद के ये पलकें
हो..बेकरार सी लरज़ती
लरज़ती सी छाँव में रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका....
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(Rafi version)
दिल जो ना कह सका
वोही राज़-ए-दिल कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
तौबा ये किस ने अंजुमन सजा के
टुकड़े किये हैं गुंच-ए-वफ़ा के - २
उछालो गुलों के टुकड़े
के रंगीं फ़िज़ाओं में रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
चलिये मुबारक ये जश्न दोस्ती का
दामन तो थामा आप ने किसी का - २
हमें तो खुशी यही है
तुम्हें भी किसी को अपना कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका
सागर उठाओ दिल का किस को ग़म है
आज दिल की क़ीमत जाम से भी कम है - २
पियो चाहे खून-ए-दिल हो
के पीते पिलाते ही रहने की रात आई

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