Sunday, 28 March 2021

 

DUAL VERSIONS OF THE SAME SONG BY MOHAMMED RAFI & LATA MANGESHKAR

BHEEGI RAAT (1965)

The film is a triangular love-story. Pradeep Kumar and Meena Kumari love each other but by a quirk of fate she gets engaged to Ashok Kumar. The way music director Roshan has extracted two totally different versions from these two singers conveying contrasting emotions is just incredible. In fact, Roshan  gives Rafi one of his career-best songs in –‘Dil jo na keh saka wohi raaze dil kehne ki raat aayi…’ and the kind of hurt and pain Rafi Saab manages to convey in his version is unbelievable!  On the other hand Lataji infuses a quiet dignity to her sensuous romantic version,  Majrooh’s lyrics are simply awesome.

Mohammed Rafi

Lata Mangeshkar


Saturday, 27 March 2021

 

            रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे

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On the occasion of Holi, here is a song by Amitabh Bachchan in his own voice from Silsila (1982).  Lyrics are by Amitabh's father- Harivanshrai Bachchan and the music is by Shiv-Hari (Pandit Shivkumar Sharma and Pandit Hariprasad Chaurasia). Silsila was a classic romantic film with Amitabh, Jaya and Rekha in lead roles. Film magazines wrote that the story of the film is inspired by the relationship between the three in real life! 





रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे
अरे कैने मारी पिचकारी तोरी भीगी अंगिया
ओ रंगरसिया रंगरसिया, हो
रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

सोने की थाली में जोना परोसा
अरे, सोने की थाली में, जोना परोसा
हाँ, सोने की थाली में जोना परोसा
अरे खाए गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

लौंगा इलायची का, अरे लौंगा इलायची का
लौंगा इलायची का? हाँ!
अरे लौंगा इलायची का बीड़ा लगाया
हाँ लौंगा इलायची का बीड़ा लगाया
चाबे गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

अरे बेला चमेली का सेज बिछाया
बेला चमेली का, सेज बिछाया
अरे बेला चमेली का सेज बिछाया
हाँ बेला चमेली का सेज बिछाया
सोए गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

 


ये समां हम तुम जवान

कहदो तो दिल तड़प जाये

ये प्यार की तेरी गली छोड़ी न जाये

हाय रे हाय

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A nice duet by Kishore Kumar and Meena Kapoor from the film  Mashooqa (1953). The film had Mukesh, Suraiya, Durga Khote, Kuldeep Kaur, Agha. Very likely, this song was picturized on Agha and Kuldeep Kaur.


Music was by Roshan and lyrics by Shailendra. Incidentally, Meena Kapoor later married composer Anil Biswas. 





ये समां हम तुम जवान
कहदो तो दिल तड़प जाये
ये प्यार की तेरी गली छोड़ी न जाये
हाय रे हाय

मिल जाये जो तुझसे नज़र
ये नन्हा सा दिल धड़क जाये
ये प्यार की तेरी गली छोड़ी न जाये
हाय रे हाय

भीगी भीगी ये चांदनी रात
आँखो ही आँखो में जाये
में खुछ कहु दिल खुछ खे
यद् बैरी बलम की सताये रे
बिन तेरे मुझ को ग़म घेरे
रहे दिल उदास हर दम

ये समां हम तुम जवान
कहदो तो दिल तड़प जाये
ये प्यार की तेरी गली अब छोड़ी न जाये
हाय रे हाय

मेरी मेरी नजरो के भेजे हुए
तार का तो जवाब दो
मेरे मेरे थी क्या खबर
तुम भी नियत के इतने ख़राब हो
तेरी बाकि नजर की झांकी
लड़खड़ाते है मेरे कदम
चिकि बेम चिकि बेम
चिकि बेम चिकि बेम
चिंकी चिंकी चिंकी चिंकी चिंकी
चिकि बेम चिकि बेम
मिलने का है ये मौसम
ये शामा तुम जवा
पहलु से दिल तड़प जाये
ये प्यार की तेरी गली छोड़ी न जाये
हाय रे हाय.

                             प्रिया राजवंश

Thursday, 25 March 2021

                             खय्याम

खय्याम का जन्म 18 फरवरी, 1927 को पंजाब में हुआ था। खय्याम ने अपने म्यूजिक करियर की शुरुआत लुधियाना में 1943 में 18 वर्ष की आयु में की थी। 1953 में फुटपाथ फिल्म से उन्होंने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की। 1961 में आई फिल्म शोला और शबनम से र खय्याम साहब को पहचान मिलनी शुरू हुई। आखिरी खत, कभी-कभी, त्रिशूल, नूरी, बाजार, उमराव जान और यात्रा में धुनें दीं। 

खय्याम का पूरा नाम है मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी। चार भाई और एक बहन। घर में कविता और संगीत का माहौल था जिस कारण किसी ने भी उनके संगीत सीखने पर एतराज नहीं किया। संगीत की शुरुआती तालीम खय्याम ने उस दौर के मशहूर संगीतकार पंडित हुस्नलाल भगतराम और पंडित अमरनाथ से हासिल की। खय्याम ने अपने शानदार संगीत की बदौलत चार दशक के करियर में पद्मभूषण समेत कई अवार्ड जीते। बंटवारे से पहले पंजाब में सआदत हुसैन के बतौर जन्मे खय्याम को बचपन से ही फिल्मों और संगीत से लगाव था।


खय्याम ने अपना सपना पूरा करने के लिए 18 साल की उम्र में मशहूर पाकिस्तानी म्यूजिक डायरेक्टर बाबा चिश्ती के साथ लाहौर में काम शुरू किया। लेकिन घरवालों के दबाव के चलते उन्हें दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान आर्मी ज्वाइन करनी पड़ी। हालांकि तीन साल बाद खय्याम ने आर्मी की नौकरी छोड़ दी और फिल्म संगीत में करियर शुरू करने के लिए बॉम्बे का रुख किया।

खय्याम ने 1947 से काम शुरू किया, पर तब पांच साल तक वो खय्याम नहीं, बल्कि शर्माजी के नाम से काम करते थे। तभी उन्हें पंजाब फिल्म प्रोडक्शन की ‘हीर रांझा’ में काम करने का मौका मिला। 1958 में रिलीज हुई फिल्म ‘फिर सुबह होगी’ से ख्य्याम को पहचान मिली, जिसका श्रेय उन्होंने गीतकार साहिर लुधियानवी को दिया। साहिर ने ही फिल्म के संगीत के लिए राज कपूर को ख्य्याम का नाम सुझाया था। खय्याम उस दौर को याद करते हुए बताते हैं,’मैंने इसलिए हां की, क्योंकि मुझे मालूम था कि राज कपूर साहब को संगीत का भी काफी इल्म है और वो शायरी भी समझते हैं।’ उन्होंने पांच धुनें बनाईं, हर एंगल से। इतना राज कपूर साहब को खुश करने के लिए काफी था।


संगीत में अपने योगदान के लिए खय्याम को 2010 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। 2011 में उन्हें पद्मभूषण पुरस्कार मिला। खय्याम, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को कुछ जबरदस्त रोमांटिक गाने दिए, वो अपनी कामयाबी और हुनरमंदी का श्रेय अपनी पत्नी जगजीत कौर को देते हैं। खय्याम की पत्नी जगजीत कौर भी अच्छी गायिका हैं। उन्होंने ख़य्याम के साथ कुछ फिल्मों ‘बाज़ार’, ‘शगुन’ और ‘उमराव जान’ में काम भी किया है।

60 के दशक में ख्य्याम ने कई फिल्मों में हिट म्यूजिक दिया, जिनमें ‘शोला और शबनम‘, ‘फुटपाथ’ और ‘आखिरी खत’ शामिल थीं। 70 के दशक में खय्याम की सबसे यादगार कंपोजिशन आई यश चोपड़ा के साथ, जिनकी शुरुआत हुई 1976 में ‘कभी-कभी’ से। इस फिल्म में खय्याम ने अपनी काबीलियत साबित कर दी। 80 के दशक में खय्याम ने कुछ सबसे यादगार कंपोज़िशंस तैयार किए।1980 में आई फिल्म ‘थोड़ी सी बेवफाई’ इसका अच्छा उदाहरण है। लेकिन खय्याम का सबसे मशहूर संगीत सामने आया मुजफ्फर अली की फिल्म ‘उमराव जान’ में। इस साउंडट्रैक के लिए उन्हें 1981 में नेशनल अवार्ड भी मिला। उमराव जान के लिए ख्य्याम को 1982 में उनका दूसरा फिल्मफेयर अवार्ड मिला और ये सिलसिला फिल्म ‘बाजार’ के यादगार गानों के साथ आगे बढ़ गया। फिल्मों के अलावा खय्याम ने मीना कुमारी की उर्दू शायरी ‘आई राइट-आई रिसाइट’ के लिए भी संगीत दिया। 80 के दशक में डिस्को और सिंथेसाइजरों के आने के साथ संगीत को लेकर खय्याम की क्लासिकल समझ के चाहने वालों की फेहरिस्त छोटी पड़ती गई।


खय्याम ने बताया कि पाकीजा की जबरदस्त कामयाबी के बाद उमराव जान का संगीत बनाते समय, उन्हें बहुत डर लग रहा था। उन्होंने कहा कि “पाकीजा और उमराव जान की पृष्भूमि एक जैसी थी। उमराव जान और पाकीजा का विषय लगभग एक ही था, ‘पाकीजा’ कमाल अमरोही साहब ने बनाई थी, जिसमें मीना कुमारी, अशोक कुमार, राज कुमार थे। इसका संगीत गुलाम मोहम्मद ने दिया था और यह जबरदस्त हिट फिल्म थी। ऐसे में उमराव जान का संगीत बनाते समय मैं बहुत डरा हुआ था। लोग पाकीजा में सब कुछ देख सुन चुके थे। ऐसे में उमराव जान के संगीत को खास बनाने के लिए मैंने इतिहास पढ़ना शुरू किया।” आखिरकार खय्याम की मेहनत रंग लाई 1982 में रिलीज हुई मुजफ्फर अली की ‘उमराव जान’ ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए। फिल्म के गाने ‘इन आंखो की मस्ती’ में और ‘दिल चीज क्या है‘ आज भी लोग नहीं भूल पाए हैं।


खय्याम बचपन में छिप–छिपाकर फ़िल्में देखा करते थे जिसकी वजह से उनके परिवार वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। खय्याम अपने करियर की शुरुआत अभिनेता के तौर पर करना चाहते थे पर धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी फ़िल्मी संगीत में बढ़ती गई और वह संगीत के मुरीद हो गए।

खय्याम साहब ने अपनी सारी संपत्ति जन्मदिन पर दान करने की घोषणा की थी। करीब 12 करोड़ की इस संपत्ति से वे और उनकी गायिका पत्नी जगजीत कौर फिल्म जगत के जरूरतमंद और उभरते संगीतकारों के लिए एक ट्रस्ट बनाया,  इस ट्रस्ट का नाम ‘खय्याम प्रदीप जगजीत चैरिटेबल ट्रस्ट’  रखा ।इसके मुख्य ट्रस्टी गजल गायक तलत अजीज और उनकी पत्नी बीना है,  खय्याम साहब के कहना  था कि देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और अब वे देश को कुछ लौटाना चाहते हैं।

ज़हूर खय्याम का 92 साल की उम्र में निधन हो गया था।

 

Pyar Jagane Wala Neend Churane Wala Aagaya

A lesser known Manna Dey Lata Mangeskar duet from the film Zara Bachke (1959). The film had Suresh and Nanda in lead roles and music is by Nashad. Lyrics are by Asad Bhopali.


Nashad had composed music for several Hindi films before migrating to Pakistan in '60s. 

This was perhaps the first film where Nanda had the romantic lead role. She had earlier appeared in supporting roles.



This Lata Mangeshkar song is from Shatranj (1956) with Ashok Kumar and Meena Kumari in lead roles. Music is by C Ramachandra (CR) and lyrics by Rajinder Krishan. The film also had Nanda (one of the early films for Nanda). This song appears in the film twice, both in happy moods. But the mood of Ashok KUmar is different- happy in first, sad in the second. 

Both versions of this Do Pehlu Do Rang Do Geet song have playback by Lata.




हवा है सर्द सर्द और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा

मौसम का रंग है अजीब, बुल्बुल से फूल है करीब
आये बहार के कदम, जाग है बाग का नसीब
सुनके घटा का शोर, जंगल में नाचा मोर
बरसी है कहीं आज घटा

शाकें सवर सवर गयी, कलियां निखर निखर गयी
देखा समा झुला झुला, नज़रे जिधर जिधर गयी
कैसा अजब है रंग, भीगा है अंग अंग
बरसी है कहीं आज घटा

हवा है सर्द सर्द...
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हवा है सर्द सर्द और दिल में भी है दर्द
बरसी है कहीं आज घटा

मौसम का रंग है अजीब,बुल्बुल से फूल है करीब
आये बहार के कदम,जागा है बाग का नसीब
सुनके घटा का शोर, जंगल में नाचा मोर
बरसी है कहीं आज घटा

ठण्डी हवा के साथ साथ, दिल में ये आ रही है बात
जाऊँ यहां से दूर दूर, हातों में लेके उनक हाथ
मचला हुआ है दिल, ऐसे में आके मिल
बरसी है कहीं आज घटा

हवा है सर्द सर्द...